लेखिका: आचार्य डॉ. सरिता मिश्रा (PhD, Gold Medalist)
Vedic Jyotish Sikshan Sansthan
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणपति के स्मरण से ही की जाती है। वर्ष 2026 में 6 मार्च 2026 को संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत पड़ रहा है, जिसे विशेष रूप से कष्टों को दूर करने और मनोकामना पूर्ण करने वाला व्रत माना गया है।
ज्योतिष और आध्यात्मिक साधना के अपने कई वर्षों के अनुभव में मैंने देखा है कि यदि यह व्रत सही विधि और श्रद्धा के साथ किया जाए, तो जीवन की अनेक बाधाएँ दूर हो जाती हैं — चाहे वह कुंडली के ग्रह दोष हों, आर्थिक संकट हो, विवाह में बाधा हो या मानसिक तनाव।
इस लेख में मैं संकष्टी चतुर्थी का महत्व, व्रत विधि और कुछ प्रभावशाली उपाय साझा कर रही हूँ, जो मेरे अनुभव में अत्यंत फलदायी सिद्ध हुए हैं।
संकष्टी चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व
“संकष्टी” शब्द का अर्थ है संकट या कष्ट का नाश करने वाला।
यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे विशेष रूप से कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से:
जीवन के बड़े संकट दूर होते हैं
ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं
धन और समृद्धि प्राप्त होती है
मानसिक शांति मिलती है
संतान सुख की प्राप्ति होती है
वेदिक ज्योतिष में गणेश जी को बुद्धि, विवेक और बाधा निवारण के देवता माना गया है।
6 मार्च 2026 संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि
यदि आप इस व्रत को करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित विधि अपनाएँ:
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- घर के मंदिर को साफ करके भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
- उन्हें दूर्वा, लाल फूल, मोदक और लड्डू अर्पित करें।
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- पूरे दिन फलाहार रखें और मन में गणेश जी का स्मरण करें।
- रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।
संकष्टी चतुर्थी के विशेष ज्योतिषीय उपाय
मेरे ज्योतिषीय अनुभव में ये उपाय अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुए हैं।
- बाधा निवारण के लिए
संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी को 21 दूर्वा घास अर्पित करें।
- आर्थिक समस्या दूर करने के लिए
भगवान गणेश को गुड़ और चने का भोग लगाएँ।
- कुंडली के राहु-केतु दोष के लिए
गणेश मंदिर में जाकर लाल सिंदूर अर्पित करें।
- विवाह में बाधा के लिए
“गणपति अथर्वशीर्ष” का पाठ करें।
मेरे अनुभव से एक सत्य घटना
ज्योतिष और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के अपने अनुभव में मैंने कई लोगों को इस व्रत से लाभ प्राप्त करते देखा है।
एक बार मेरे पास एक युवक अपनी कुंडली में लगातार बाधाओं को लेकर आया। उसके जीवन में नौकरी, विवाह और आर्थिक स्थिति — हर जगह रुकावटें आ रही थीं।
कुंडली विश्लेषण करने पर मैंने उसे लगातार 7 संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने और गणेश मंत्र जप करने का सुझाव दिया।
लगभग 6 महीनों बाद वह दोबारा मिला और उसने बताया कि:
उसकी नौकरी लग गई
विवाह का योग बन गया
जीवन में मानसिक शांति आई
ऐसे अनेक अनुभवों ने मुझे यह विश्वास दिलाया है कि श्रद्धा और सही मार्गदर्शन के साथ किया गया व्रत निश्चित रूप से फल देता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से संकष्टी चतुर्थी क्यों महत्वपूर्ण है
वेदिक ज्योतिष में गणेश जी को केतु ग्रह का अधिपति माना जाता है।
इसलिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी होता है यदि आपकी कुंडली में:
केतु दोष हो
राहु-केतु का अशुभ प्रभाव हो
बुध कमजोर हो
शिक्षा या करियर में बाधा हो
निष्कर्ष
संकष्टी चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि और जीवन में संतुलन का साधन है।
यदि आप जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं से परेशान हैं, तो भगवान गणेश की उपासना और यह व्रत आपके लिए एक शक्तिशाली आध्यात्मिक उपाय बन सकता है।
श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा के साथ किया गया हर उपाय निश्चित रूप से फल देता है।
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