षटतिला एकादशी 2026: शास्त्र, साधना और मेरे व्यक्तिगत अनुभव

✨ — आचार्य डॉ. सरिता मिश्रा (Gold Medalist – Astrology)

हिंदू पंचांग में एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मा के शोधन की एक गहन साधना है। मेरे वर्षों के ज्योतिषीय, आध्यात्मिक और व्यक्तिगत अनुभवों में मैंने यह स्पष्ट रूप से अनुभव किया है कि षटतिला एकादशी सबसे प्रभावशाली एकादशियों में से एक है।

वर्ष 2026 में षटतिला एकादशी 14 जनवरी, बुधवार को पड़ रही है, और इस वर्ष इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह मकर संक्रांति जैसे महापर्व के साथ एक दुर्लभ संयोग बना रही है।


🌼 षटतिला एकादशी का वास्तविक अर्थ (मेरे अनुभव से)

“षट” अर्थात छह और “तिला” अर्थात तिल।
शास्त्रों में तिल को पाप नाशक, पितृ शांति कारक और शनि-दोष शमन करने वाला माना गया है।

लेकिन केवल शास्त्र नहीं —
👉 मेरे व्यक्तिगत अनुभव में, जब भी मैंने या मेरे परामर्श में आए जातकों ने इस दिन नियमपूर्वक तिल के छह प्रयोग किए हैं,
✔ जीवन की अटकनें कम हुईं
✔ मानसिक भारीपन हल्का हुआ
✔ और कर्मिक बाधाओं में स्पष्ट कमी देखने को मिली


🌾 तिल के छह प्रयोग — शास्त्र + अनुभव

शास्त्र कहते हैं और अनुभव इसकी पुष्टि करता है कि इस दिन तिल का प्रयोग इन छह तरीकों से करना चाहिए:

1️⃣ तिल मिश्रित जल से स्नान
→ मेरे अनुभव में यह नकारात्मक ऊर्जा को हटाने में अत्यंत प्रभावी है।

2️⃣ तिल से अभ्यंग (तेल मालिश)
→ विशेषकर जिन लोगों पर शनि का दबाव होता है, उन्हें इससे मानसिक स्थिरता मिलती है।

3️⃣ तिल से हवन या दीपदान
→ मैंने स्वयं देखा है कि इससे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बनता है।

4️⃣ तिल का दान (काले तिल विशेष)
→ यह कर्मिक ऋण को हल्का करता है, विशेषकर पूर्वजों से जुड़े दोषों में।

5️⃣ तिल युक्त भोजन या प्रसाद
→ यह शरीर के साथ-साथ मन को भी संतुलित करता है।

6️⃣ तिल से तर्पण
→ मेरे अनुभव में यह पितृ कृपा को जाग्रत करने का श्रेष्ठ उपाय है।


🌞 2026 में मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का दुर्लभ योग

मैं यह बात पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूँ कि
👉 जब षटतिला एकादशी मकर संक्रांति के साथ आती है,
तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय
✔ कर्म शुद्धि
✔ शनि और सूर्य के संतुलन
✔ तथा आत्मिक उन्नति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ होता है।

मेरे कई शिष्यों और परामर्शार्थियों ने ऐसे वर्षों में जीवन की दिशा बदलने वाले अनुभव साझा किए हैं।


🙏 पूजा-विधि (जैसा मैं स्वयं करती हूँ)

मेरे व्यक्तिगत साधना अनुभव के अनुसार:

🔹 ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान
🔹 भगवान विष्णु का ध्यान
🔹 तिल से दीपक जलाना
🔹 “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप
🔹 दिनभर सात्त्विक भाव और मौन

👉 और सबसे महत्वपूर्ण —
व्रत को बोझ नहीं, कृतज्ञता के साथ करना

यही इस व्रत का वास्तविक रहस्य है।


📿 दान-पुण्य और कर्म सिद्धांत (अनुभवजन्य सत्य)

मैंने अपने जीवन में यह स्पष्ट देखा है कि
👉 षटतिला एकादशी पर किया गया दान तुरंत फल नहीं, लेकिन स्थायी परिवर्तन देता है।

विशेष रूप से: ✔ तिल
✔ कंबल
✔ भोजन
✔ गौ-सेवा

ये सब कर्म जीवन की अदृश्य रुकावटों को धीरे-धीरे हटाते हैं।


🌟 निष्कर्ष: यह व्रत क्यों “विशेष” है?

मेरे अनुभव, शास्त्र और ज्योतिष — तीनों एक बात कहते हैं:

🔸 षटतिला एकादशी केवल व्रत नहीं
🔸 यह कर्म शुद्धि की प्रक्रिया है
🔸 यह आत्मा को हल्का करने का माध्यम है
🔸 और 2026 में यह अवसर अत्यंत दुर्लभ है

यदि आप जीवन में अंदरूनी शांति, कर्मिक संतुलन और ईश्वर से जुड़ाव चाहते हैं, तो यह व्रत अवश्य करें।


✍️ लेखिका का अनुभवात्मक संदेश

धर्म तब फल देता है, जब वह डर से नहीं, श्रद्धा और समझ से किया जाए।
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