36 गुण का सच, भ्रम और सही ज्योतिषीय दृष्टिकोण
शादी तय करते समय सबसे पहला सवाल यही पूछा जाता है:
“कितने गुण मिल रहे हैं?”
कई जगह 18 से कम गुण हों तो रिश्ता मना कर दिया जाता है,
और कहीं 36 गुण मिलते ही आँख बंद करके शादी तय कर दी जाती है।
लेकिन सच्चा सवाल यह है:
👉 क्या सच में 36 गुण मिलान से शादी सफल होती है?
👉 या फिर यह सिर्फ एक अधूरी प्रक्रिया है?
ज्योतिष शास्त्र इस विषय को बहुत गहराई और संतुलन से देखता है।
गुण मिलान क्या है? (सिर्फ नंबर नहीं)
गुण मिलान को अष्टकूट मिलान कहा जाता है,
जिसमें वर–वधू की चंद्र राशि और नक्षत्र के आधार पर
8 कूटों के माध्यम से 36 गुण मिलाए जाते हैं।
ये कूट केवल अंक नहीं,
बल्कि वैवाहिक जीवन के अलग-अलग पहलुओं को दर्शाते हैं:
- मानसिक सामंजस्य
- स्वास्थ्य
- संतान सुख
- यौन संतुलन
- पारिवारिक स्थिरता
👉 यानी गुण मिलान का उद्देश्य शादी को रोकना नहीं,
बल्कि संभावित समस्याओं को पहले समझना है।
सबसे बड़ा भ्रम: “18 से कम गुण = शादी नहीं”
यह सबसे आम और सबसे खतरनाक गलतफहमी है।
ज्योतिष शास्त्र में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि
18 से कम गुण होने पर शादी असफल होगी।
👉 कई सफल विवाह ऐसे हैं जिनमें:
- 12–15 गुण मिले
- लेकिन कुंडली के अन्य योग मजबूत थे
और कई असफल विवाह ऐसे भी हैं जिनमें:
- पूरे 36 गुण मिले
- लेकिन ग्रह दशा और भाव संतुलित नहीं थे
गुण मिलान में क्या नहीं देखा जाता?
यही वह जगह है जहाँ लोग गलती करते हैं।
गुण मिलान नहीं बताता:
- मंगल दोष
- दशा–महादशा
- सप्तम भाव की वास्तविक स्थिति
- विवाह के बाद का समय (timing)
इसलिए सिर्फ गुण देखकर शादी तय करना
ऐसा है जैसे सिर्फ रंग देखकर घर खरीद लेना।
तब सही कुंडली मिलान कैसे होता है?
एक अनुभवी ज्योतिषी विवाह के लिए देखता है:
- सातवाँ भाव (विवाह सुख)
- शुक्र और चंद्रमा की स्थिति
- मंगल दोष की वास्तविकता
- दशा–महादशा का समय
- गुण मिलान (supporting tool की तरह)
👉 गुण मिलान आख़िरी नहीं, शुरुआती कदम है।
2026 में विवाह के लिए गुण मिलान क्यों और ज़रूरी हो जाता है?
2026 में:
- शनि रिश्तों में परिपक्वता की परीक्षा लेगा
- गुरु सही रिश्तों को आगे बढ़ाएगा
- राहु जल्दबाज़ी और भ्रम पैदा कर सकता है
इसलिए 2026 में:
- केवल गुण मिलान पर शादी करना जोखिम भरा हो सकता है
- लेकिन पूरा कुंडली विश्लेषण विवाह को सुरक्षित बना सकता है
गुण कम हों तो क्या शादी नहीं करनी चाहिए?
नहीं।
अगर:
- सप्तम भाव मजबूत हो
- शुक्र संतुलित हो
- दशा अनुकूल हो
तो कम गुणों के बावजूद
विवाह स्थिर और सुखद हो सकता है।
गुण मिलान डराने के लिए नहीं,
समझदारी बढ़ाने के लिए है।
अनुभवी ज्योतिषी की भूमिका क्यों निर्णायक है?
आज इंटरनेट पर:
- auto kundli matching tools
- instant gun milan reports
सब मिल जाते हैं,
लेकिन उनमें विवेक और अनुभव नहीं होता।
इसी संतुलित दृष्टिकोण से
Acharya Dr. Sarita Mishra
गुण मिलान को अंतिम फैसला नहीं,
बल्कि कुंडली विश्लेषण का एक हिस्सा मानती हैं
और उसी आधार पर विवाह को लेकर
स्पष्ट, शांत और व्यावहारिक मार्गदर्शन देती हैं।
निष्कर्ष: गुण नहीं, संतुलन विवाह चलाता है
शादी अंक से नहीं चलती,
वह समझ, समय और संतुलन से चलती है।
👉 36 गुण मिलना अच्छी बात है
👉 लेकिन सही ग्रह और सही समय
उससे कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है।