लेखिका : आचार्य डॉ. सरिता मिश्रा (PhD Gold Medalist)
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3 जून 2026 संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान श्री गणेश जी को समर्पित होता है। “संकष्टी” शब्द का अर्थ है — संकटों का नाश करने वाली। जो भी व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करता है, उसके जीवन के अनेक प्रकार के कष्ट धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
3 जून 2026 को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी अत्यंत शुभ मानी जा रही है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन मानसिक तनाव, आर्थिक बाधा, विवाह में रुकावट, नौकरी समस्या और पारिवारिक कलह को शांत करने के लिए विशेष फलदायी रहेगा।
अपने वर्षों के ज्योतिष अनुभव में मैंने देखा है कि जिन लोगों की कुंडली में राहु, केतु, शनि या मंगल से संबंधित बाधाएँ होती हैं, उन्हें संकष्टी चतुर्थी का व्रत अद्भुत लाभ देता है। कई बार केवल गणपति उपासना से रुके हुए कार्य अचानक बनने लगते हैं।
संकष्टी चतुर्थी 2026 पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
इसके बाद भगवान गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजा सामग्री
- दूर्वा
- मोदक या लड्डू
- लाल फूल
- चंदन
- धूप दीप
- अक्षत
- नारियल
पूजा कैसे करें
सबसे पहले दीपक जलाएं और गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।
फिर “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
इसके बाद संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें।
संकष्टी चतुर्थी के विशेष उपाय
- आर्थिक समस्या दूर करने का उपाय
यदि घर में लगातार धन रुक रहा हो तो गणेश जी को 11 दूर्वा और गुड़ अर्पित करें।
यह उपाय मैंने अनेक लोगों को बताया है और आश्चर्यजनक परिणाम मिले हैं।
- नौकरी और करियर में सफलता
गणेश जी को सिंदूर चढ़ाकर “गणेश अथर्वशीर्ष” का पाठ करें।
जिन विद्यार्थियों और नौकरी तलाश रहे युवाओं ने यह उपाय किया, उनके अंदर आत्मविश्वास और अवसर दोनों बढ़े।
- विवाह बाधा दूर करने हेतु
संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश मंदिर में पीले लड्डू चढ़ाएं और कन्याओं को मिठाई बांटें।
- ग्रह दोष शांति
यदि कुंडली में राहु-केतु या शनि पीड़ा दे रहे हों तो इस दिन गणपति मंत्र का जाप अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
मेरे अनुभव से संकष्टी चतुर्थी का चमत्कार
लगभग 18 वर्षों से ज्योतिष, टैरो और हस्तरेखा पर कार्य करते हुए मैंने हजारों लोगों की कुंडलियों का अध्ययन किया है। कई बार ऐसे लोग मेरे पास आए जिनके जीवन में लगातार रुकावटें थीं — विवाह नहीं हो रहा था, व्यापार में घाटा था, मानसिक तनाव था।
मैंने उन्हें नियमित संकष्टी चतुर्थी व्रत और गणपति साधना करने की सलाह दी। आश्चर्यजनक रूप से कुछ ही महीनों में उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगे।
एक महिला, जो कई वर्षों से संतान सुख के लिए परेशान थीं, उन्होंने पूरे श्रद्धाभाव से गणपति उपासना और चतुर्थी व्रत किया। कुछ समय बाद उनके जीवन में सुखद परिवर्तन आया। ऐसे अनेक अनुभव मुझे यह विश्वास दिलाते हैं कि श्रद्धा और सही विधि से किया गया व्रत वास्तव में ऊर्जा परिवर्तन करता है।
किन लोगों को अवश्य करना चाहिए यह व्रत?
- जिनके कार्य बार-बार रुकते हों
- जिन पर कर्ज बढ़ रहा हो
- जिनके विवाह में बाधा हो
- विद्यार्थी
- नौकरी और व्यवसाय में संघर्ष कर रहे लोग
- मानसिक तनाव से परेशान व्यक्ति
ज्योतिषीय दृष्टि से संकष्टी चतुर्थी क्यों महत्वपूर्ण है?
वैदिक ज्योतिष में भगवान गणेश को बुद्धि, निर्णय शक्ति और विघ्न विनाशक माना गया है। जब व्यक्ति की कुंडली में बुध कमजोर हो, राहु भ्रम पैदा करे या शनि जीवन में संघर्ष बढ़ाए, तब गणपति उपासना व्यक्ति को मानसिक स्थिरता देती है।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा और मन को भी संतुलित करता है। इसलिए यह केवल धार्मिक व्रत नहीं बल्कि आध्यात्मिक और ऊर्जा शुद्धि का भी माध्यम है।
निष्कर्ष
3 जून 2026 की संकष्टी चतुर्थी केवल एक धार्मिक तिथि नहीं है बल्कि जीवन के संकटों को दूर करने का एक दिव्य अवसर है। श्रद्धा, विश्वास और सही पूजा विधि से किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सफलता ला सकता है।
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