विवाह में देरी क्यों होती है?

कुंडली के छिपे कारण, मानसिक प्रभाव और 2026 में ज्योतिषीय समाधान

आज के समय में विवाह में देरी एक बहुत आम समस्या बन चुकी है।
कई लोग योग्य होने के बावजूद सही रिश्ता नहीं पा रहे, तो कई जगह बात बनते-बनते टूट जाती है।
ऐसे में एक सवाल बार-बार उठता है:

“क्या मेरी शादी में कोई ग्रह बाधा है?”

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाह केवल सामाजिक निर्णय नहीं,
बल्कि कुंडली में ग्रहों के संतुलन से जुड़ा हुआ विषय है।


विवाह में देरी का अर्थ क्या है? (पहले यह स्पष्ट करें)

हर व्यक्ति के लिए “देरी” की परिभाषा अलग होती है।
लेकिन सामान्य रूप से अगर:

  • 27–28 वर्ष (महिला)
  • 30–32 वर्ष (पुरुष)

के बाद भी विवाह के योग स्पष्ट न बनें,
तो इसे कुंडली आधारित देरी माना जाता है।

यह देरी केवल उम्र की नहीं,
बल्कि योग के सक्रिय न होने की होती है।


कुंडली में विवाह को कौन-से तत्व नियंत्रित करते हैं?

विवाह एक ही ग्रह या भाव से तय नहीं होता।
इसके लिए कई स्तरों पर विश्लेषण आवश्यक होता है:

🔹 1. सातवाँ भाव (सबसे महत्वपूर्ण)

  • विवाह
  • जीवनसाथी
  • साझेदारी

अगर सातवाँ भाव:

  • पीड़ित हो
  • या उसका स्वामी कमजोर हो

तो विवाह में रुकावट आती है।


🔹 2. शुक्र ग्रह (वैवाहिक सुख का कारक)

शुक्र प्रेम, आकर्षण और वैवाहिक संतुलन का ग्रह है।
अगर शुक्र:

  • नीच का हो
  • पाप ग्रहों से ग्रसित हो
  • या छठे, आठवें, बारहवें भाव से जुड़ा हो

तो रिश्ते बनकर भी टूट सकते हैं।


🔹 3. चंद्रमा (मानसिक स्थिति)

कई बार कुंडली में योग होता है,
लेकिन व्यक्ति स्वयं निर्णय नहीं ले पाता।

कमज़ोर चंद्रमा:

  • भ्रम
  • भय
  • ओवरथिंकिंग

पैदा करता है, जिससे विवाह टलता चला जाता है।


ग्रह दोष जो विवाह में देरी का कारण बनते हैं

🔸 मंगल दोष

मंगल का प्रभाव विवाह में टकराव और जल्दबाज़ी लाता है।
गलत स्थान पर मंगल:

  • रिश्तों में तनाव
  • असहमति
  • या विवाह टूटने का कारण बन सकता है

लेकिन यह जानना ज़रूरी है कि
हर मंगल दोष नुकसानदेह नहीं होता।


🔸 शनि का प्रभाव

शनि देरी का ग्रह है,
लेकिन वह विवाह को नकारता नहीं —
वह परिपक्वता के बाद विवाह देता है।

शनि का प्रभाव यह सिखाता है:

“जल्द नहीं, सही समय पर।”


🔸 राहु-केतु की भूमिका

राहु भ्रम और असामान्य परिस्थितियाँ लाता है।
केतु अलगाव और उदासीनता।

इनका प्रभाव:

  • अचानक रिश्ता टूटना
  • बिना कारण बात बिगड़ना
  • या विवाह से मन हटना

भी पैदा कर सकता है।


2026 में विवाह के लिए ग्रह गोचर क्या संकेत देते हैं?

2026 में:

  • गुरु का गोचर कई कुंडलियों में विवाह योग को सक्रिय करेगा
  • लेकिन शनि यह सुनिश्चित करेगा कि
    रिश्ता केवल भावनात्मक नहीं, व्यावहारिक रूप से भी मजबूत हो

👉 इसका अर्थ यह है कि:

  • जल्दबाज़ी में किया गया निर्णय टिकेगा नहीं
  • लेकिन सही समय पर बना रिश्ता स्थायी होगा

2026 विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है:

  • जिनकी उम्र 28+ हो चुकी है
  • जिनके रिश्ते बार-बार टूट रहे हैं
  • या जो मानसिक असमंजस में हैं

क्या उपाय सच में काम करते हैं?

हाँ — लेकिन केवल तब,
जब उपाय कुंडली आधारित हों।

सामान्य उपाय:

  • बिना कुंडली देखे रत्न पहनना
  • इंटरनेट से मंत्र शुरू करना

कई बार स्थिति और बिगाड़ देता है।

👉 सही उपाय वही है:

  • जो चल रही दशा के अनुसार हो
  • और ग्रह की प्रकृति के अनुरूप हो

अनुभवी मार्गदर्शन क्यों निर्णायक होता है?

विवाह एक जीवनभर का निर्णय है।
इसमें डर दिखाना नहीं,
स्पष्टता और संतुलन देना ज़रूरी होता है।

इसी दृष्टिकोण से
Acharya Dr. Sarita Mishra
कुंडली के सभी स्तर — भाव, ग्रह, दशा और गोचर —
को जोड़कर विवाह से जुड़ी समस्या का
व्यावहारिक और शांत समाधान सुझाती हैं।

यह मार्गदर्शन व्यक्ति को:

  • आत्मविश्वास
  • सही समय की समझ
  • और निर्णय की स्पष्टता

प्रदान करता है।


निष्कर्ष: विवाह देर से सही, गलत नहीं होना चाहिए

ज्योतिष शास्त्र यह नहीं कहता कि
विवाह जल्दी होना चाहिए।

यह कहता है:

“विवाह सही समय पर, सही व्यक्ति के साथ होना चाहिए।”

अगर कुंडली के संकेतों को समझकर
सही निर्णय लिया जाए,
तो देरी भी जीवन को सुरक्षित बना सकती है।

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