रिश्ते बनते-बनते क्यों टूट जाते हैं?

ग्रहों का मनोवैज्ञानिक और ज्योतिषीय विश्लेषण

आज के समय में सबसे ज़्यादा सुनने को मिलता है:

“सब कुछ ठीक चल रहा था, फिर अचानक रिश्ता टूट गया।”

कई बार सालों पुराने रिश्ते भी बिना किसी बड़े कारण के खत्म हो जाते हैं।
ऐसे में लोग सवाल करते हैं —
“क्या यह सिर्फ हमारी गलती थी, या इसके पीछे कोई ग्रह बाधा भी होती है?”

ज्योतिष शास्त्र इस प्रश्न को भावनात्मक ही नहीं,
बल्कि मनोवैज्ञानिक और ऊर्जात्मक स्तर पर भी समझाता है।


रिश्ते केवल भावनाओं से नहीं चलते

यह मान लेना कि रिश्ता सिर्फ प्यार से चलता है —
एक अधूरी सच्चाई है।

हर रिश्ता तीन स्तरों पर चलता है:

  1. भावनात्मक स्तर
  2. मानसिक स्तर
  3. कर्म और ग्रह स्तर

जब इन तीनों में संतुलन बिगड़ता है,
तो रिश्ता चाहे जितना भी मजबूत दिखे —
अंदर से टूटने लगता है।


कुंडली में रिश्तों को कौन नियंत्रित करता है?

रिश्तों का विश्लेषण सिर्फ सातवें भाव से नहीं होता।
इसके पीछे कई गहरे संकेत होते हैं:

🔹 चंद्रमा — भावनात्मक स्थिरता

चंद्रमा मन का प्रतिनिधित्व करता है।

कमज़ोर या पीड़ित चंद्रमा:

  • ओवरथिंकिंग
  • असुरक्षा
  • बिना कारण शक

पैदा करता है,
जिससे रिश्ता धीरे-धीरे ज़हरीला बन जाता है।


🔹 शुक्र — प्रेम और सामंजस्य

शुक्र रिश्ते में:

  • आकर्षण
  • स्नेह
  • शारीरिक और भावनात्मक संतुलन

लाता है।

अगर शुक्र पीड़ित हो:

  • प्यार जल्दी खत्म होता है
  • अपेक्षाएँ बढ़ जाती हैं
  • और संतुष्टि कम हो जाती है

🔹 राहु — भ्रम और गलत उम्मीदें

राहु रिश्तों में सबसे खतरनाक ग्रह माना जाता है।

राहु का प्रभाव:

  • बहुत ज़्यादा उम्मीदें
  • झूठा आकर्षण
  • तुलना की आदत

पैदा करता है।

शुरुआत में रिश्ता “परफेक्ट” लगता है,
लेकिन समय के साथ भ्रम टूटता है —
और रिश्ता भी।


🔹 शनि — दूरी और ठंडापन

शनि रिश्ता तोड़ता नहीं,
लेकिन भावनात्मक दूरी ला देता है।

जब शनि का प्रभाव बढ़ता है:

  • संवाद कम होता है
  • जिम्मेदारियाँ भारी लगने लगती हैं
  • और रिश्ता बोझ जैसा महसूस होने लगता है

दशा–महादशा का असर: सही रिश्ता, गलत समय

बहुत बार रिश्ता गलत नहीं होता,
समय गलत होता है।

अगर:

  • शुक्र की जगह राहु की दशा चल रही हो
  • या चंद्रमा पीड़ित दशा में हो

तो व्यक्ति:

  • सही बात भी गलत समझ लेता है
  • और छोटी बातों पर बड़ा फैसला ले लेता है

इसीलिए कई बार ब्रेकअप के बाद लोग कहते हैं:

“काश उस समय थोड़ा रुक गए होते…”


2026 में रिश्तों को लेकर विशेष सावधानी क्यों?

2026 में:

  • शनि रिश्तों में परिपक्वता की परीक्षा लेगा
  • राहु भ्रम और जल्दबाज़ी बढ़ा सकता है
  • गुरु सही मार्गदर्शन का अवसर देगा

इसका अर्थ यह है:

  • अधूरे रिश्ते टूट सकते हैं
  • लेकिन मजबूत रिश्ते और गहरे होंगे

2026 “भावना से नहीं, समझ से” चलने का साल है।


सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं

लोग अक्सर:

  • केवल सामने वाले को दोष देते हैं
  • या खुद को पूरी तरह दोषी मान लेते हैं

जबकि ज्योतिष कहता है:

“रिश्ता टूटना दोष नहीं, संकेत होता है।”

संकेत कि:

  • संवाद कमजोर हो गया
  • भावनात्मक ज़रूरतें अनदेखी हुईं
  • या समय के अनुसार निर्णय नहीं लिया गया

क्या टूटे रिश्ते सुधर सकते हैं?

हाँ —
लेकिन केवल तब, जब:

  • ego नहीं, समझ हो
  • जल्दबाज़ी नहीं, धैर्य हो
  • और सही समय का इंतज़ार हो

हर रिश्ता हमेशा के लिए खत्म नहीं होता,
कुछ रिश्ते रुककर परिपक्व होने के लिए टूटते हैं।


अनुभवी ज्योतिषी की भूमिका क्यों अहम है?

रिश्तों के मामलों में:

  • डर फैलाना
  • या “ये रिश्ता खत्म है” कहना

सबसे आसान है।

लेकिन असली विशेषज्ञ वह होता है जो:

  • ग्रहों की स्थिति
  • मानसिक अवस्था
  • और समय के प्रभाव

को जोड़कर
संतुलित और शांत मार्गदर्शन दे।

इसी दृष्टिकोण से
Acharya Dr. Sarita Mishra
रिश्तों को भाग्य की सज़ा नहीं,
बल्कि आत्म-विकास की प्रक्रिया मानकर देखती हैं —
और उसी अनुसार सलाह देती हैं।


निष्कर्ष: हर टूटन अंत नहीं होती

हर रिश्ता टूटकर खत्म नहीं होता।
कुछ रिश्ते टूटकर:

  • सच्चाई दिखाते हैं
  • व्यक्ति को परिपक्व बनाते हैं
  • और सही निर्णय की ओर ले जाते हैं

ज्योतिष शास्त्र का उद्देश्य
रिश्तों को बाँधना नहीं,
उन्हें समझदारी से निभाने की शक्ति देना है।

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