कुंडली में दोष कैसे पहचानें?

पितृ दोष, कालसर्प दोष और मांगलिक दोष – मेरे अनुभव से समझिए

लेखिका: आचार्य डॉ. सरिता मिश्रा (PhD, Gold Medalist)

पिछले कई वर्षों से जब लोग मेरे पास कुंडली लेकर आते हैं, तो सबसे पहला सवाल यही होता है —
“मैम, मेरी कुंडली में कोई दोष तो नहीं?”

मैं हमेशा यही कहती हूँ —
दोष कुंडली में नहीं, पहले मन में बैठा होता है।
क्योंकि हर ग्रह योग समस्या नहीं बनता, लेकिन कुछ विशेष स्थितियाँ जीवन में बार-बार रुकावट ज़रूर दिखाती हैं।

अपने अनुभव में मैंने देखा है कि जब व्यक्ति मेहनत बहुत करता है, फिर भी परिणाम नहीं मिलता,
या परिवार, विवाह और मानसिक शांति बार-बार प्रभावित होती है,
तो वहाँ केवल वर्तमान नहीं, कुंडली का गहरा संकेत काम कर रहा होता है।


पितृ दोष कैसे पहचानें? (अनुभव आधारित)

जब कुंडली में सूर्य, चंद्रमा या नवम भाव पर राहु-केतु या शनि का दबाव होता है
और साथ ही जीवन में बिना कारण बाधाएँ, पारिवारिक अशांति या संतान से जुड़ी चिंता दिखे,
तो वहाँ पितृ दोष की संभावना बनती है।

मेरे पास ऐसे कई लोग आए हैं जो कहते थे —
“मैम, सब कुछ ठीक है, फिर भी कुछ अटका हुआ लगता है।”

अनुभव बताता है कि पितृ दोष अक्सर अधूरे कर्तव्य या पूर्वजों से जुड़ी अनदेखी का संकेत होता है, डर का नहीं।


कालसर्प दोष के संकेत

जब कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं,
तो कालसर्प दोष बनता है।

अपने अनुभव में मैंने देखा है कि ऐसे लोग
बाहर से बहुत मजबूत दिखते हैं,
लेकिन अंदर से लगातार अस्थिर रहते हैं।
जीवन में अचानक ऊँचाई और अचानक गिरावट —
यह कालसर्प दोष का सामान्य संकेत है।

लेकिन मैंने यह भी देखा है कि
सही मार्गदर्शन मिलने पर यही लोग असाधारण सफलता भी पाते हैं।


मांगलिक दोष वास्तव में कब प्रभावी होता है?

जब मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो,
तो उसे मांगलिक दोष कहा जाता है।

लेकिन अपने वर्षों के अनुभव से मैं साफ़ कह सकती हूँ —
हर मंगल दोष विवाह को नुकसान नहीं पहुँचाता।

कई कुंडलियों में मंगल साहस, नेतृत्व और ऊर्जा देता है।
गलत समझ और डर ही इसे समस्या बनाते हैं।


मेरा अनुभव क्या कहता है?

मैंने यही सीखा है —
✔ दोष डराने के लिए नहीं होते
✔ हर कुंडली अलग होती है
✔ सही समझ और सही उपाय से दिशा बदली जा सकती है

कुंडली भविष्य नहीं तय करती,
वह केवल संकेत देती है।


निष्कर्ष

कुंडली पढ़ना केवल ग्रह देखना नहीं,
इंसान को समझना है।

अगर आपको लगता है कि जीवन में बार-बार रुकावट आ रही है,
तो दोष से डरिए नहीं —
उसे सही दृष्टि से समझिए।

— आचार्य डॉ. सरिता मिश्रा 🙏

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