छुपे हुए ज्योतिषीय कारण, समय की गलती और अधूरा विश्लेषण
बहुत से लोग मानते हैं कि अगर:
- 18 से ज़्यादा गुण मिल जाएँ
- मंगल दोष न हो
- और पंडित जी ने “सब ठीक है” कह दिया
तो शादी अपने आप सफल हो जाएगी।
लेकिन हकीकत इससे काफ़ी अलग है।
आज के समय में ऐसे हज़ारों मामले हैं जहाँ
पूरा कुंडली मिलान होने के बावजूद विवाह टूट गया।
इससे एक बड़ा सवाल उठता है:
👉 क्या कुंडली मिलान अधूरा था?
👉 या फिर शादी का समय ही गलत था?
सबसे पहली सच्चाई: कुंडली मिलान ≠ विवाह की गारंटी
ज्योतिष शास्त्र कभी यह दावा नहीं करता कि
कुंडली मिलान शादी की गारंटी है।
कुंडली मिलान का उद्देश्य है:
- संभावित समस्याओं को पहचानना
- और उनसे निपटने की तैयारी करना
लेकिन अगर मिलान के बाद:
- सही समय (दशा) न देखा जाए
- या ग्रहों की गहराई से जाँच न हो
तो शादी तकनीकी रूप से सही,
लेकिन व्यावहारिक रूप से कमजोर हो जाती है।
कारण 1️⃣: केवल गुण मिलान पर निर्भर रहना
यह सबसे आम गलती है।
अष्टकूट गुण मिलान:
- मानसिक और शारीरिक सामंजस्य दिखाता है
- लेकिन यह नहीं बताता कि
- शादी के बाद का समय कैसा रहेगा
- कौन-सा ग्रह कब सक्रिय होगा
👉 कई बार 24–26 गुण मिलते हैं,
लेकिन सातवें भाव पर शनि या राहु का दबाव
शादी के बाद असंतुलन पैदा कर देता है।
कारण 2️⃣: दशा–महादशा की अनदेखी
शादी कुंडली से नहीं,
समय से चलती है।
अगर विवाह के समय:
- राहु की दशा
- केतु की अंतरदशा
- या शनि की कठिन अवधि
चल रही हो,
तो रिश्ता शुरुआत से ही तनाव में आ सकता है।
👉 यही वजह है कि कई लोग कहते हैं:
“शादी के कुछ महीनों बाद सब बदल गया।”
असल में, दशा बदल गई थी।
कारण 3️⃣: सातवें भाव की सतही जाँच
अधिकांश जगहों पर:
- सिर्फ सातवें भाव को देखा जाता है
- लेकिन उसके स्वामी ग्रह की स्थिति
- और उस पर आने वाले दृष्टि प्रभाव
को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
अगर:
- सातवें भाव का स्वामी कमजोर हो
- या छठे/आठवें भाव से जुड़ा हो
तो विवाह में:
- विवाद
- कानूनी परेशानी
- या अलगाव
का खतरा बढ़ जाता है —
चाहे गुण कितने भी अच्छे क्यों न हों।
कारण 4️⃣: मानसिक स्तर का मेल न होना
ज्योतिष केवल ग्रह नहीं देखता,
मनुष्य की मानसिक परिपक्वता भी देखता है।
अगर:
- एक व्यक्ति भावनात्मक रूप से बहुत निर्भर हो
- और दूसरा बहुत अलग-थलग स्वभाव का हो
तो समय के साथ:
- संवाद टूटने लगता है
- अपेक्षाएँ टकराने लगती हैं
- और रिश्ता बोझ बन जाता है
👉 यह समस्या अक्सर
कमज़ोर चंद्रमा या असंतुलित शुक्र से जुड़ी होती है।
कारण 5️⃣: “सब ठीक है” कहकर उपाय न बताना
कई बार ज्योतिषी कहते हैं:
“सब ठीक है, शादी कर दीजिए।”
लेकिन सही मार्गदर्शन वह होता है जो:
- संभावित चुनौती भी बताए
- और उसके लिए मानसिक या व्यवहारिक तैयारी भी करवाए
बिना तैयारी के की गई शादी
छोटी समस्याओं को भी बड़ा बना देती है।
2026 के संदर्भ में यह समस्या क्यों और गंभीर हो सकती है?
2026 में:
- शनि रिश्तों की कठोर परीक्षा लेगा
- राहु जल्दबाज़ी और भ्रम बढ़ाएगा
- गुरु केवल उन्हीं रिश्तों को सहारा देगा
जो समझ और धैर्य पर आधारित होंगे
इसलिए 2026 में:
- केवल गुण मिलान पर शादी करना
जोखिम भरा हो सकता है - लेकिन पूरा कुंडली + समय विश्लेषण
विवाह को बचा सकता है
सही सवाल क्या होना चाहिए?
गलत सवाल ❌
“हमारे कितने गुण मिल रहे हैं?”
सही सवाल ✅
“क्या हम इस समय शादी के लिए तैयार हैं?”
“क्या हमारी दशा और ग्रह इस रिश्ते को संभाल पाएँगे?”
यही अंतर एक सफल और असफल विवाह तय करता है।
अनुभवी मार्गदर्शन यहाँ क्यों निर्णायक बन जाता है?
विवाह टूटने से पहले:
- डर नहीं
- दोषारोपण नहीं
बल्कि समझ और समय की पहचान ज़रूरी होती है।
इसी संतुलित दृष्टिकोण से
Acharya Dr. Sarita Mishra
कुंडली मिलान को अंतिम सत्य नहीं,
बल्कि एक प्रारंभिक संकेत मानकर
पूरे चार्ट, दशा और मानसिक स्तर को जोड़कर
विवाह से जुड़े निर्णयों पर मार्गदर्शन देती हैं।
यह मार्गदर्शन:
- गलत समय पर शादी से बचाता है
- रिश्तों को टूटने से पहले संभालने का मौका देता है
- और व्यक्ति को सशक्त निर्णय लेने में मदद करता है
निष्कर्ष: कुंडली मिलान आधार है, फैसला नहीं
कुंडली मिलान
शादी का दरवाज़ा खोलता है,
लेकिन घर कैसे चलेगा —
यह समय, समझ और जिम्मेदारी तय करती है।
अगर इन तीनों को नज़रअंदाज़ किया गया,
तो अच्छे गुण भी
शादी को नहीं बचा पाते।